दक्षिण मुंबई में 272 जर्जर इमारतें अभी तक नहीं गिराई गईं, फाइलों में दबी रहती है कार्रवाई

राज्य सरकार की पुनर्विकास नीतियां बन गई समस्या, हादसों से कोई नहीं ले रहा सबक

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई.
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी इमारतों के चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं, लेकिन कुछ हादसे सरकार और सरकारी एजेंसियों की लापरवाही के कारण होते हैं और इसकी कीमत अनायास ही आसपास के लोगों और आम राहगीरों को चुकानी पड़ती है। मुंबई में खासकर दक्षिण मुंबई में 272 जर्जर इमारतें वर्षों पहले खाली करा लिया गया है, फिर भी उन इमारतों को अभी तक गिराया नहीं गया है। वहीं राज्य सरकार की पुनर्विकास नीतियां एक समस्या बन गई हैं। सरकार बदलने के साथ ही पुनर्विकास नीतियों में बदलाव कर दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनीं रहती हैं। पहले भी मुंबई में इमारतों के गिरने के कई हादसे हो चुके हैं, जिससे कोई सबक नहीं लिया गया। मुंबई में जर्जर हो चुकी खतरनाक इमारतों की सूची बीएमसी और महाराष्ट्र गृहनिर्माण क्षेत्रविकास प्राधिकरण (म्हाडा) हर साल जारी करती हैं, लेकिन आगे की कार्रवाई फाइलों में दबी रह जाती हैं।

सुरक्षित किया जाना चाहिए क्षेत्र : महापौर

इस संदर्भ में महापौर किशोरी पेडणेकर का कहना है कि ऐसी सभी खाली इमारतों को पहचानने की आवश्यकता है, जो जर्जर हैं। वॉर्ड स्तर के माध्यम से ऐसी इमारतों के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगभग 17 हजार इमारतें हैं, जो पुरानी हो चुकी हैं। हमने जी-दक्षिण वॉर्ड परेल और वर्ली इलाके को सूचित किया है कि इमारतों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया जाए। जो इमारतें खाली हैं, उस पर भी ध्यान दें, जिससे हादसों को रोका जा सके।

निराकरण के लिए दूरदृष्टी की आवश्यकता…

खतरनाक इमारतों के गिरने से अब तक 300 लोगों की जान जा चुकी है। दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव, बोरा बाज़ार, कालबा देवी, चीरा बाजार, डोंगरी, ताड़वाड़ी, नल बाजार आदि इलाकों में अधिकतर इमारतों की आयु 60 साल से अधिक हो चुकी है। कुछ संरचनाएं 92 वर्ष पुरानी हैं। बोरा बाजर का बोकारिया भवन वर्षों से खाली पड़ा है। फोर्ट में मंजूनाथ निवास भी उन्हीं में से एक है। पूर्व भाजपा नगरसेवक भरत गुर्जर का कहना है कि इमारतों के पुनर्निर्माण में पुरानी और जर्जर इमारतों की सम्सया सरकार विशेषकर उच्च अधिकारियों के कारण विकराल रूप धारण कर चुकी है। इस के निराकरण के लिए दूरदृष्टी की आवश्यकता है।

टुकड़ों में निर्णय लेना समस्या का हल नहीं…

इमारतों की मरम्मत के लिए मकान मालिक और किरायदार दोनों की जवाबदेही तय करनी होगी। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। पुनर्निर्माण के लिए भी वर्तमान पॉलिसी पर्याप्त नहीं है। इसमें बहुत सुधार की आवश्यकता है, लगभग सभी निर्णय बिल्डर के हितों को ध्यान मे रखकर ही लिए जाते हैं, जिस कारण मकान मालिक और किरायदार दोनों का सहयोग नहीं होता। वहीं पर आवश्यक सेवाओं के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता। सभी मुद्दों को समावेश कर यदि पॉलिसी बनाई जाए, वही सार्थक होगी। टुकड़ों में लिए गए निर्णय न तो समस्या का हल है और न ही शहर के समुचित विकास के लिए योग्य है।

जारी है आगे का प्रोसेस…

मुंबई में 272 इमारतें नॉन डेवलपमेंट प्लॉट के दायरे में हैं। ऐसी इमारतों को लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट विभाग के पास भेजा है, जिससे व्यापक सर्वे कर पुनर्निर्माण किया जा सके। इन इमारतों का पुननिर्माण या तो पीएमजीपी के अंतर्गत होगा या उसका अधिग्रहण कर बीएमसी को सौंपने कर उससे टीडीआर हासिल कर सके। रिपेयर बोर्ड ने 18 इमारतों को खाली कराया था, जिसका आगे का प्रोसेस चल रहा है।
– विनोद घोसालकर, अध्यक्ष, रिपेयर बोर्ड, म्हाडा

Share