वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने से भारतीय कपास किसान की वैश्विक मांग बढ़ेगी : सीके पटेल

कपास भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में कपड़ा उद्योग के लिए सबसे उम्दा और सबसे पसंदीदा फाइबर

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. कपास भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में कपड़ा उद्योग के लिए सबसे उम्दा और सबसे पसंदीदा फाइबर बना हुआ है। यह भारतीय कपास किसान समुदाय को स्थायी किस्म की आजीविका देने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण फसल है। वर्तमान में भारत के अंदर 50 से 60 मिलियन लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए कपास की खेती, इसकी मार्केटिंग, प्रसंस्करण और इसका निर्यात करने पर निर्भर हैं। पिछले कुछ वर्षों से कपास की खेती में वैश्विक स्तर पर लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए अभूतपूर्व दबाव के चलते 2020/21 के दौरान विश्व भर में कपास की खेती ने नाटकीय बदलाव झेले हैं।

भारतीय कपास की खेती…

एक नजर में भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में गिना जाता है, जो पूरे विश्व के कपास का लगभग 26% हिस्सा उत्पादित करता है। देश में कपास की खेती के हिस्से सबसे बड़ा रकबा आता है जो 12.5 मिलियन हेक्टेयर से लेकर 13.0 मिलियन हेक्टेयर के बीच बैठता है। यह कपास की वैश्विक खेती का लगभग 41 प्रतिशत रकबा है। कपास का उत्पादन मुख्य रूप से देश के गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु और ओडिशा राज्य में किया जाता है।

किसान कपास की खेती में हासिल करेंगे टिकाऊ विकास : सीके पटेल

भारत में कपास की खेती की टिकाऊ पद्धतियों के बारे में बात करते हुए नेटाफिम इंडिया के एजीएम (एग्रोनॉमी एंड मार्केटिंग) सीके पटेल (CK Patel) ने कहा कि मौजूदा परिदृश्य को बदलने के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि किसानों को कपास-कृषि की गुणकारी पद्धतियों एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाने के बारे में जागरूक किया जाए। जल का वैज्ञानिक एवं समानतावादी अनुप्रयोग, उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रभावी उपयोग करने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर उत्पादित इस नकदी फसल के लिए पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा देने से ही भारतीय किसान कपास की खेती में टिकाऊ विकास हासिल कर पाएंगे।

व्यापक प्रसार करने की आवश्यकता…

तकनीक आर्थिक लाभों के अलावा कई सामाजिक और पर्यावरण-संबंधी लाभ भी प्रदान करती है। चूंकि भारतीय किसान किसी भी ऐसी तकनीक को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं, जो उनके जीवन में निश्चितता लाए और उनकी आय बढ़ाए, इसलिए कपास की खेती में ड्रिप इरिगेशन का व्यापक प्रसार करने की आवश्यकता है। कपास की खेती में माइक्रो-इरिगेशन के क्रियान्वयन की सफलता जागरूकता अभियानों और किसानों के प्रभावी प्रशिक्षण पर निर्भर करती है।

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