मुख्यमंत्री का कारवां गुजर गया, दिन भर लाभ-हानि का होता रहा सीटी स्कैन

जुलाई तक मेडिकल कालेज में आएंगे 51 प्रोफेसर डॉक्टर, VIP दौरों के वक्त रोक-टोक लाजिमी

– सलिल पांडेय
मिर्जापुर. कोरोना का अध्ययन करने आए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जहां प्रशासनिक हल्के के दौरे के पहले तक सूख गए हलक में तरावट आई तथा मुख्यमंत्री के प्रस्थानोपरांत उच्च अधिकारी अपने कनिष्ठों को बधाई और शाबासी दे रहे थे, वहीं कनिष्ठ पदों के लोग कुशल मार्ग-दर्शन के लिए वरिष्ठ ऑफिसरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहे थे, जबकि सत्तापक्ष के बड़े नेताओं के जगह-जगह रोक-टोक को लेकर कुछ पार्टी के लोग तो उससे ज्यादे सोशल-साइट पर भी मजे लेने के लिए बवंडर को हवा दी जा रही थी। हालांकि यह बवंडर बहुत मोर्चा इसलिए नहीं थाम सका, क्योंकि यह तो प्राचीन जमाने से होता रहा है कि VIP दौरों के वक्त रोक-टोक तथा धक्का-मुक्की होती ही रही। बिना इसके लगता ही नहीं कि कोई VIP आया था।

कमिश्नर ने सबको बचा लिया…

जहां मुख्यमंत्री के सफल दौरे के लिए कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र (Yogeshwar Ram Mishra) ने DM प्रवीण कुमार लक्षकार (Praveen Kumar Lakshkar) के नेतृत्व को सराहा, वहीं जिला स्तर से लेकर मंडल स्तर के अधिकारियों ने एक स्वर से कहा कि सारा दायित्व कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र अपने ऊपर ले ले रहे थे, लिहाजा मुख्यमंत्री के आगे नर्वस हो रहे आफिसर्स को जीवनदान मिल रहा था। वरना होता यह कि बड़े नेता खासकर मुख्यमंत्री आदि की बैठकों में VIP के आभामंडल के आगे बहुत से तो बोल नहीं पाते, जुबान लड़खड़ा जाती ही है।

नहीं उठ सकी कोविड टेस्ट के अलग लैब की मांग…

मुख्यमंत्री जब सांसद और विधायकों से गुफ्तगूं कर रहे थे तो जिले के कई प्राथमिक सेंटरों के डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायत ज्यादा उठ गई। हालांकि यह मुद्दा कमिश्नर और DM स्तर पर हल हो सकता था। मुख्यमंत्री के कम समय को देखते हुए मंडलीय अस्पताल में ENT डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने का मुद्दा उठना चाहिए था, ताकि मुख्यमंत्री यहीं से आदेश देते तो 3 या 4 दिनों में डॉक्टर आ जाते। इसके अलावा सिर्फ एक एनेस्थेसिस्ट से हो रही दिक्कतों को देखते हुए एक और नियुक्ति के साथ अस्पताल के परमानेंट लैब से अलग हटकर कोविड टेस्ट का अलग लैब की मांग भी उठनी चाहिए थी।

अक्टूबर से शुरू हो सकेगा मेडिकल कॉलेज…

पूर्व राज्यमंत्री तथा वर्तमान सांसद अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) के प्रयासों कापरिणाम राजकीय मेडिकल कॉलेज (Medical College) है, जिसकी शुरुआत तो अब तक हो गई होती, लेकिन NEET की परीक्षा कोरोना की वजह से स्थगित हो जाने के कारण अब इसे अक्टूबर से तब शुरू किया जा सकेगा। जब सितंबर में स्थगित परीक्षा हो जाए। जब स्टूडेंट ही नहीं रहेंगे तो प्रोफेसर किसे पढ़ाएंगे?

पहले संविदा पर रखे जाएंगे 36 डॉक्टर…

फिलहाल उक्त कॉलेज में 51 प्रोफेसर डॉक्टर एडमिशन होने के बाद पढ़ाने लगेंगे। 15 प्रोफेसरों की नियुक्ति तो उच्च सेवा आयोग से तो तीन-चार महीने पहले हो गई है, पटना के सर्जन यहां के लिए स्थायी प्रिंसिपल भी नियुक्त हो गए हैं। सभी जुलाई तक आ जाएंगे, जबकि सत्र शुरू होने के पहले 36 डॉक्टर संविदा पर रखे जाएंगे, जिनकी योग्यता MD और MS होनी चाहिए।

विन्ध्याचल CHC के अपग्रेड की मांग भी नहीं…

मुख्यमंत्री के समक्ष विन्ध्याचल CHC के अपग्रेड की मांग होती तो वह इसलिए उपयोगी होता, क्योंकि बढ़ती आबादी के चलते वाराणसी की तरह जिला अस्पताल की जरूरत अब हो गई है। इसके लिए अमरावती और देवरहा बाबा मार्ग पर भूमि लेकर स्थापना की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।

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