नांदेड़ लोस सीट के लिए पत्‍नी का भेजा गया था नाम, पिता शंकर राव के साथ भी हुआ था ऐसा
कांग्रेस ने अपनी पुरानी कार्य पद्धति को रखा कायम
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नांदेड़ लोस सीट के लिए पत्‍नी का भेजा गया था नाम, पिता शंकर राव के साथ भी हुआ था ऐसा

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण की इच्छा न होते हुए भी उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस की पुरानी नीति रही है कि जो राज्य में है, उन्हें दिल्ली भेजो और वहीं दिल्ली वालों को राज्य में…। चव्हाण की मांग थी कि उनकी पत्नी अमिता चव्हाण को को नांदेड़ से लोकसभा टिकट दिया जाए, ताकि चव्हाण का एक बार फिर से मुंबई में आने का संयोग बना रहे। कुछ ऐसा ही कटु अनुभव अशोक के पिता शंकर राव चव्हाण को भी 1987 में रहा है, उन्हें दिल्ली से मुंबई मुख्यमंत्री बनाकर भेजा गया था, शरद पवार के कांग्रेस में आने के बाद शंकरराव को मुख्यमंत्री पद छोड़ कर वापस दिल्ली बुला लिया गया था।

उन्हें आज भी है गम…

उल्लेखनीय है कि शरद पवार को भी नरसिम्हा राव ने ऐसे ही दिल्ली से मुंबई भेजा था। 1991 में पवार कुर्सी के लिए तैयारी कर ली थी, पवार को यह पद मिला नहीं, लेकिन उनके पास रक्षा मंत्री का पद आया मुंबई में हुए दंगों के बाद सुधाकर नाईक को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी और फिर नरसिम्हा राव ने पवार को फिर से मुंबई भेज दिया। सुशील कुमार शिंदे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। 2014 में सीके शिंदे के नेतृत्व में राज में फिर से कांग्रेस की सरकार आई, लेकिन शिंदे कुछ कर पाते इसके पहले ही उन्हें हैदराबाद का राज्यपाल बना कर भेज दिया गया। सुशील शिंदे ने अनिच्छा से पद संभाला, बाद में केंद्र में गृह और ऊर्जा के पद मिले, लेकिन मुंबई छोड़ने का गम उन्हें आज भी है।

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