नियमों को ताक पर रख करीबियों को बांटे गए कर्ज के चलते डूबा बैंक, कथित तौर पर २५ हजार करोड़ रुपए का घोटाला
पवार सहित ५० नेताओं पर कोर्ट का शिकंजा, पांच दिन के भीतर FIR दर्ज करने का आदेश
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नियमों को ताक पर रख करीबियों को बांटे गए कर्ज के चलते डूबा बैंक, कथित तौर पर २५ हजार करोड़ रुपए का घोटाला

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में कथित तौर पर २५ हजार करोड़ रुपए के घोटाले में राकांपा नेता अजीत पवार सहित ५० लोगों के खिलाफ पांच दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश बांबे हाईकोर्ट ने पुलिस को दिया है। नियमों को ताक पर रख बांटे गए कर्ज की वसूली नहीं होने से बैंक भारी घाटे में डूब गया। बैंक के संचालकों में पवार के अलावा जयंत पाटील, विजय सिंह मोहित पाटील, हसन मुश्रिफ, मधुकर चव्हाण, आनंदराव अडसूल, शिवाजीराव नलावडे आदि के नाम शामिल हैं। बैंक के संचालकों में कांग्रेस, राकांपा, शिवसेना और भाजपा के बड़े नेता शामिल हैं।
सुनवाई के दौैरान कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि बैंक के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया नहीं। वकील ने बताया कि अभी तक केस नहीं दर्ज किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने पांच दिन के भीतर सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर रिपोर्ट तलब की है। विधानसभा चुनाव से पहले एफआईआर दर्ज करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन नेताओं की मुश्किल बढ़ गई है।
एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को यह आदेश दिया। जनहित याचिका सुरिंदर अरोड़ा की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अरबों रुपए के घोटाले में पुलिस नरमी बरत रही है। आरोप है कि बैंक के निदेशक मंडल में शामिल नेताओं ने अपने समर्थकों को कर्ज दिलाने में नियमों को ताक पर रख दिया। घाटे में डूबे बैंक के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रशासक नियुक्त किया है। नाबार्ड ने जब बैंक के खातों की जांच कराई तो अमियमितताएं उजागर हुईं।

ऑडिट रिपोर्ट से खुली पोल

नाबार्ड की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि चीनी कारखानों तथा कताई मिलों को कर्ज बांटने और ऋण वसूली  के मामले रिजर्व बैंक के नियमों का पालन नहीं किया गया। सरकार की ओर से नियुक्त अद्र्ध-न्यायिक जांच आयोग ने महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था, जिसमें पवार सहित कई अन्य निदेशकों को बैंक को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

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