Share

मुंबई की वजह से गिर रही रेटिंग, नए निर्वाहन नियमों के बावजूद 26 प्रतिशत पर अटकी रिकवरी दर 

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. नए निर्वहन नियमों को लागू करने के 10 दिन बाद भी राज्य केंद्र रिकवरी दर में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अभी तक सिर्फ 26 प्रतिशत मरीज अस्पताल से ठीक होकर घर वापस लौटे हैं। मुंबई में यह दर 27 प्रतिशत तक था। दोनों दरें राज्य के रिकवरी रेट 40 प्रतिशत से भी कम है। निर्वहन नियमों को लागू करने के पहले राज्य की रिकवरी दर 19 प्रतिशत थी। जानकार मानते हैं कि मुंबई में कम रिकवरी रेट की वजह से राज्य का रिकवरी दर कम है। तमिलनाडु जो देश का दूसरा सबसे ज्यादा कोविड-19 संक्रमित राज्य है और यहां रिकवरी रेट 39 प्रतिशत है। गुजरात जहां 12 हजार प्लस कोविड-19 के मरीज हैं। वहां भी रिकवरी रेट 42 प्रतिशत है। केरला में 642 मरीज हैं और 497 ठीक हो गए हैं। केरला में रिकवरी रेट 77 प्रतिशत है। अप्रैल में महाराष्ट्र का रिकवरी रेट 12 प्रतिशत था और यह 10 मई में घटकर 19 प्रतिशत रह गया। उसके बाद यह बढ़कर 26 प्रतिशत तक पहुंच सका।

जांच कराने की जरूरत नहीं…
मई में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि जो मरीज ज्यादा गंभीर लक्षण वाले नहीं हैं। उन्हें घर भेजने से पहले टेस्ट देने समेत निर्वहन नियमों के तहत दो बार जांच कराने की जरूरत नहीं है,  जिससे बेड जल्दी खाली हो जाएंगे। टास्क फोर्स के एक सदस्य ने कहा कि महाराष्ट्र का रिकवरी दर क्यों नहीं बढ़ रहा, यह एक रहस्य है। ये बात यह दर्शाती है कि अस्पतालों में बैठ जल्दी खाली नहीं हो रहे, लेकिन जब तक वृद्धि दर कम है। तब तक रिकवरी दर के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है। 

नई नीति से जल्दी खाली हो रहे बेड…
स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि आईसीएमआर की नई नीति की वजह से बेड जल्दी खाली हो रहे हैं। मालेगांव जहां कोविड-19 बढ़ते जा रहे हैं। वहां रिकवरी दर 53 प्रतिशत है। पालघर में 80 प्रतिशत है। हम नए मरीजों का भी पता लगा रहे हैं और जो अस्पताल में हैं उनका इलाज भी कर रहे हैं। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मुंबई का रिकवरी दर कम है, क्योंकि रोज बड़ी संख्या में महामारी वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। इसलिए हमें मरीजों को बहुत सावधानी के साथ घर भेजना पड़ रहा है। 

औसतन 7-8 दिन तक रहते हैं मरीज…
वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आयुक्त डॉ. अनूप कुमार यादव ने कहा कि मरीज औसतन 7-8 दिन तक अस्पताल में रहते हैं। इससे पहले हम मरीजों को 14 दिनों तक अस्पताल में रखते थे और फिर उनका रिपोर्ट आने में 2 और दिन लगते थे। कुल 16 दिन एक मरीज अस्पताल में रहता था, लेकिन अब यह बदल गया है। 

Share