कोविड19 से बचाव के लिए रिज़र्व होंगे 80:20 बेड, राज्य स्वास्थ्य विभाग की पहल

निजी अस्पतालों में बिस्तर आरक्षण जारी रखना ही बुद्धिमानी : स्वास्थ्य अधिकारी

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई.
स्वास्थ्य विभाग जनवरी तक कोविड-19 मामलों के लिए 80:20 अनुपात में बेड आरक्षण का विस्तार करना चाहता है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 संक्रमण की संभावित दूसरी लहर और सरकार की ओर से आरक्षित बिस्तर के लिए कैप शुल्क के लिए एहतियातन बरतने के लिए बेडों को लेकर 80:20 में आरक्षण के विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। मुंबई में दिवाली के बाद पालघर, नासिक, नंदुरबार, सिंधुदुर्ग जैसे जिलों में सक्रिय कोविड-19 में बढ़ोतरी हुई है। वाशिम और नागपुर में 20 नवंबर के बाद से राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि अन्य जिलों में सक्रिय रूप से बढ़ते मामले के कारण निजी अस्पतालों में बिस्तर आरक्षण जारी रखना ही बुद्धिमानी है। महाराष्ट्र में वर्तमान में 73 हजार से अधिक सक्रिय मामले हैं। मुंबई, ठाणे और पुणे में सक्रिय संक्रमण का कहर जारी है। मुंबई में 1 महीने पहले 400-600 से लेकर 700-1000 तक के दैनिक संक्रमण में वृद्धि देखी गई।

कम मामलों पर रोका जा सकता है फार्मूला…

एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 80:20 फार्मूला हम जारी रखेंगे। भविष्य में अगर कोविड-19 के मामले कम होते हैं तो यह फार्मूला रोका जा सकता है। हालांकि निजी अस्पतालों ने सरकार के इस कदम का विरोध जरूर किया है और उनका कहना है कि उन्हें बहुत नुकसान पहले ही सरकारी कैप और आरक्षण की वजह से झेलना पड़ रहा है।

15 दिसंबर तक चलेगा आरक्षण : राजेश टोपे

स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि हम राज्य में बिस्तरों का आरक्षण जारी रखेंगे, लेकिन आखिरी हस्ताक्षर मुख्यमंत्री का होगा। हमें आरक्षित बेडों की संख्या अभी तय करनी है। कोविड-19 मामलों को देखकर हम यह तय करेंगे। वर्तमान के राज्य की अधिसूचना के आधार पर 80% बेडों का आरक्षण 15 दिसंबर तक चलेगा।

मरीजों से नहीं ले सकते अधिक शुल्क…

महाराष्ट्र सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज करने के लिए कीमतें तय की हैं, जो यह महामारी के दौरान के लिए था। अप्रैल 30 को महाराष्ट्र सरकार ने निजी अस्पतालों में बहुत सी प्रक्रिया पर कीमतें तय कर दी थी। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल और पुणे के अस्पतालों में जनरल इंश्योरेंस पब्लिक सेक्टर एसोसिएशन जीआईपीएसए के साथ उपचार पैकेज पर एक समझौता किया है, जो मरीजों के लिए सबसे कम बेड श्रेणी दरों से अधिक शुल्क नहीं ले सकते हैं।

जीआईपीएसए ने तय कीं दरें…

जीआईपीएसए सरकारी बीमा कंपनी का एक संघ है, जो अस्पतालों में सर्जरी के लिए पैकेज दरों को तय करता है। जीआईपीएसए पैकेज को नहीं मानने वाले निजी अस्पतालों में भी दरें तय की गई हैं। उदाहरण के लिए एनजीओ प्लास्टिक के लिए 12 हजार से ज्यादा नहीं, नॉर्मल डिलीवरी के लिए 75 हजार से ज्यादा नहीं, कॉन्ट्रैक्ट सर्जरी के लिए 25 हजार से ज्यादा नहीं आदि।

सामग्रियों पर 10 प्रतिशत से अधिक चार्ज नहीं…

पेसमेकर पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई), इंट्रॉक्युलर लैंसेज, स्टंट्स कैथिटर, बलून, मेडिकल इंप्लांट्स आदि सामग्रियों जैसी वस्तुओं को मार्कअप प्राइस पर 10% से अधिक चार्ज नहीं किया जा सकता। 21 मई को राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में दूसरी अधिसूचना देते हुए कहा था कि 80% बिस्तर आरक्षित रहेंगे और प्रक्रियाओं की दरों पर कैप लगाया जाएगा। 31 अगस्त को तीसरी अधिसूचना आई और 80% बिस्तर आरक्षण और प्राइस कैप नवंबर के अंत तक रहेगा, फिर अक्टूबर में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच ने अस्पतालों में गैर कोविड-19 के लिए प्राइस कैपिंग को समाप्त कर दिया।

हम भारी नुकसान उठा रहे हैं : डॉ. वी. रविशंकर

विदित हो कि महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की। डॉ. गौतम भंसाली ने कहा कि हमारा प्रस्ताव आरक्षण के प्रतिशत को कम करना है या इसे फिर से आगे बढ़ाना है। सभी अस्पताल सोमवार को अंतिम निर्णय देने के लिए सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे। डॉक्टर वी. रविशंकर ने कहा कि हमें वित्तीय रूप से बहुत नुकसान हो रहा है। हमारे अस्पताल में बहुत कम कोविड-19 मरीज हैं और हम भारी नुकसान उठा रहे हैं। हमें सरकार से जंबो सुविधाओं में मरीजों को भर्ती करने के लिए कहा है, क्योंकि वहां बहुत बड़ी क्षमता है। ऐसा लीलावती अस्पताल में अधिकारियों ने कहा।

जनवरी तक दूसरी लहर की उम्मीद…

महाराष्ट्र दैनिक आधार पर 100 से कम मौतों के साथ 4000 से 5000 नए कोविड-19 का निदान कर रहा है, जबकि पूरे राज्य में सक्रिय केस का लोड कम हो रहा है। यह दिवाली के बाद 20 नवंबर से मुंबई में थोड़ा बढ़ गया है। बहुत सारे त्यौहार साथ में आने और राज्य भर में फेज अनलॉकिंग के कारण राज्य के अधिकारी दिसंबर या जनवरी तक दूसरी कोविड-19 की लहर की उम्मीद कर रहे हैं।

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