धारावी पुनर्विकास फिर अधर में अटका, उद्धव सरकार ने रद्द किया टेंडर...
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दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी धारावीवासी पिछले डेढ़ दशक से कर रहे पुनर्विकास की प्रतीक्षा

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. धारावी पुनर्विकास के टेंडर को अभी हाल ही में महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने रद्द कर दिया है। यह तीसरी बार है, जो टेंडर रद्द किया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह निर्णय उनके साथ ठीक नहीं हुआ है। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे की महाविकास आघाडी सरकार की कैबिनेट ने बीते मंगलवार को 2018 में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से संचालित धारावी पुनर्विकास के लिए टेंडर रद्द करने का फैसला किया। दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी में से एक धारावी में पिछले डेढ़ दशक से पुनर्विकास की प्रतीक्षा की जा रही है। लेकिन सरकार ने आखिरकार टेंडर रद्द करने का फैसला किया। अब सरकार नए सिरे से निविदाएं जारी करेगी।

समिति ने दिया टेंडर रद्द करने का सुझाव…

कांग्रेस एनसीपी के सत्ता में आने पर पिछले 2 बार टेंडर मंगाए गए थे। तीसरा टेंडर तब बुलाया गया था, जब बीजेपी शिवसेना सरकार के समय देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले महाराष्ट्र विकास आघाडी ने टेंडर रद्द कर दिया है और नए सिरे से शुरुआत करने का आश्वासन दिया है। अगस्त में सचिवों की समिति (COS) ने धारावी पुनर्विकास निविदा पर एक फैसला लेने के लिए मुलाकात की। इस पर समिति ने टेंडर को रद्द करने का सुझाव दिया और उन्होंने राज्य सरकार को वही प्रस्ताव दिया, जो अंत में अमल हुआ था।

सरकार ने किया 46 एकड़ जगह का अधिग्रहण…

सीओएस ने एडवोकेट जनरल की सलाह पर अपना सुझाव दिया है, जिन्होंने नए सिरे से टेंडर देने की सलाह दी है। टेंडर जारी करने और बोलियां प्राप्त करने के बाद राज्य सरकार ने रेलवे से 800 करोड़ रुपए में 46 एकड़ जगह का अधिग्रहण किया। एक भूमि का अधिग्रहण करने और इसे पुनरविकास परियोजना का एक हिस्सा बनाने के बाद एडवोकेट जनरल से सलाह मांगी गई, जिन्होंने ताजा टेंडर के लिए सलाह दी। विदित हो कि धारावी पुनरविकास परियोजना के लिए नवंबर 2018 में वैश्विक टेंडर मंगाए गए थे। टेंडर रद्द करने का निर्णय निवासियों को पसंद नहीं आया।

पीपुल्स रिस्पांसिबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर यूनाइटेड धारावी

पीपुल्स रिस्पांसिबल ऑर्गेनाइजेशन फॉर यूनाइटेड धारावी (PROUD) के महासचिव हरिराम दिल्लीवाला ने कहा कि आम जनता परेशान है। यह झुग्गी वासियों का मजाक बनाने के अलावा और कुछ नहीं है। हमारी अगली पीढ़ी धारावी के पुनर्विकास के वादों को सुनकर बड़ी हुई है। धारावी 240 हेक्टेयर भूमि में फैला है और यह बस्ती देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के केंद्र में स्थित है। साथ ही यह मुंबई के वित्तीय केंद्र बांद्रा कुर्ला कॉन्प्लेक्स के करीब भी है। जनवरी 2019 में डीएपी को दो टेंडर मिले, जिनमें से सीलिंक ग्रुप धारावी के पुनर्विकास के लिए सबसे आगे था और रिपोर्ट के अनुसार 7 हजार 200 करोड़ रुपए का था, जबकि प्रोजेक्ट की पूर्ण कुल लागत 27 हजार करोड़ से अधिक होने का अनुमान था। जब उनकी टिप्पणी के लिए सीलिंक के हितेन शाह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा तो भारत मे होता ही रहता है, जो केवल यहीं पर संभव भी है।

बेहद नाखुश करने वाली खबर…

सरकारी हमें सिर्फ सपने दिखा रही हैं। पहले कहते हैं पुनर्विकास होगा और फिर टेंडर रद्द कर देते हैं धारावी के लोग इस खबर से बेहद ही नाखुश हैं।
– हरिराम दिल्लीवाला, महासचिव, पीपुल्स रिस्पांसिबिल ऑर्गेनाइजेशन फॉर यूनाइटेड धारावी

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