गुरु पूर्णिमा बन रहे सर्वार्थ सिद्धि योग में करें अपने सभी कार्य सिद्ध, ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री की जुबानी

हिंदू धर्म शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि बेहद अनुकूल

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. हिंदू धर्म शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन विशेष रूप से महाभारत सहित समस्त पूराण के रचयिता वेदव्यास जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि बेहद अनुकूल है, इस दिन गुरुओं की विशेष पूजा और अर्चना से जातकों को शुभ फल की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्मावलंबी के साथ यह तिथि बौध और जैन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस वर्ष यह तिथि 24 जुलाई के दिन पड़ रहा है। इस संबंध में ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी कहते हैं कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा तिथि पर सर्वार्थ योग बन रहा है, जो सभी जातकों के लिए शुभ है।

यह हैं शुभ मुहूर्त…

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : – 23 जुलाई 2021, शुक्रवार सूबह (10:44)

गुरु पूर्णिमा तिथि समापन : – 24 जुलाई 2021, शनिवार सुबह (08:07)

सर्वार्थ सिद्धि योग प्रारंभ : – 24 जुलाई 2021, दोपहर (12:40)

सर्वार्थ सिद्धि योग समापन : – 25 जुलाई 2021, सुबह (05:39)

पूजा से देवी-देवता भी प्रसन्न…

गुरुजनों को समर्पित गुरु पूर्णिमा सनातन धर्म में बहुत विशेष मानी गई है। मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि गुरुओं को समर्पित है। इस दिन गुरुओं की विशेष पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ, यह जीवन में शांति लेकर आता है। गुरुओं की पूजा से ज्ञान में वृद्धि होती है तथा हर काम नें सफलता मिलती है। यह कहा गया है कि गुरुओं का मुकाम देवों से भी ऊंचा है। इसीलिए इस दिन गुरुओं की पूजा से देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं।

गौतम बुध की भी विशेष पूजा…

महाभारत और 18 पुराणों के रचयिता गुरु वेद व्यास जी का जन्म आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर हुआ था। इस दिन वेद व्यास जी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। गुरुओं को समर्पित यह तिथि बहुत अनुकूल मानी जाती है। गुरुओं की पूजा से ज्ञान की प्राप्ति होती है और शुभ फल मिलता है। बौध धर्म में विश्वास रखने वाले लोग यह मानते हैं कि इस दिन गौतम बुध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इस दिन गौतम बुध की भी विशेष पूजा की जाती है।

प्रात:काल स्नान-ध्यान करके सबसे पहले करें गुरु को प्रणाम…

साथ ही शास्त्री जी इस दिन पूजा की विधि के बारे में बताते हुए कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान करके सबसे पहले अपने गुरु की पूजन सामग्री तैयार करें, जिसमें फूल-माला, तांबूल, श्रीफल, रोली-मोली, जनेउ, सामथ्र्य के अनुसार दक्षिणा और पंचवस्त्र लेकर अपने गुरु के स्थान पर जाएं. उसके बाद अपने गुरु के चरणों को धुलकर उसकी पूजा करें और उन्हें अपने सामथ्र्य के अनुसार फल-फूल, मेवा, मिष्ठान और धन आदि देकर सम्मानित करें।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर चमत्कारी उपाय…

  • पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष पर की जड़ों में मीठा जल डालने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने साधक पर पूरी कृपा बरसाती है।
  • पूर्णिमा की शाम को पति-पत्नी यदि साथ मिलकर चंद्रमा का दर्शन और उन्हें गाय के दूध का अघ्र्य देते हैं तो उनके दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
  • पूर्णिमा की शाम को तुलसी जी के सामने शुद्ध देशी घी का दिया जलाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
  • पूर्णिमा की शाम को चंद्र दर्शन करने के बाद दूध, गंगाजल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अघ्र्य देने से चंद्र दोष दूर होता है। अघ्र्य देने के बाद चंद्रदेव के मंत्र ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का जप करना न भूलें।
  • पूर्णिमा के दिन अपने घर को गंदा करके न रखें।
    पूर्णिमा के दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए।
  • पूर्णिमा के दिन किसी बुजुर्ग या स्त्री का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
  • पूर्णिमा के दिन भूलकर भी मांस-मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
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