संघ ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को लिखा पत्र

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से पैदा हुए संकट ने मोटर वाहन उद्योग के साथ-साथ मोटर वाहन के कलपुर्जों के निर्माताओं तथा फोर्जिंग उद्योगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उद्योग जगत धीरे-धीरे महामारी की दूसरी लहर से उबर रहा है, लेकिन स्टील की क़ीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने की वजह से भारत के फोर्जिंग उद्योग पर बुरा असर पड़ा है। भारतीय फोर्जिंग उद्योग संघ (AIFI) ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय इस्पात उद्योग द्वारा स्टील की क़ीमतों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है। भारतीय फोर्जिंग उद्योग और मोटर वाहन के कलपुर्जों के निर्माताओं को एक बड़े संकट से बचाने के लिए, संघ की ओर से स्टील की क़ीमतों में वृद्धि पर तत्काल हस्तक्षेप करने और इसे वापस लेने का अनुरोध किया गया है।

फोर्जिंग उद्योग प्रतिस्पर्धा से हो जाएगा बाहर : विकास बजाज

AIFI के अध्यक्ष विकास बजाज (Vikas Bajaj) ने कहा कि कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित होने के बाद, घरेलू स्तर पर मोटर वाहन उद्योग की ओर से मांग बढ़ने के साथ-साथ निर्यात के अनुकूल अवसर के कारण फोर्जिंग उद्योग धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है। चीन के मौजूदा हालात की वजह से, वर्तमान में उत्तरी अमेरिका और यूरोप दोनों क्षेत्रों से नए ग्राहकों द्वारा की जाने वाली पूछताछ की संख्या में वृद्धि हो रही है। स्टील की कीमतों में वृद्धि का उपभोक्ता मुद्रास्फीति सूचकांक (CII) पर बुरा असर पड़ने की बात सामने आई है। अगर सरकार स्टील की कीमतों में इस असंगत और अनुचित वृद्धि को रोकने के लिए जल्द-से-जल्द हस्तक्षेप नहीं करती है, तो उस स्थिति में भारत का पूरा ऑटो मोबाइल, ऑटो कंपोनेंट और फोर्जिंग उद्योग वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएगा।

स्टील की कीमतों में 150 यूरो की वृद्धि…

पिछले साल, स्टील की क़ीमत में तेजी से वृद्धि हुई और यह 16950/- रुपये प्रति टन तक पहुंच गया। इसके अलावा, इस्पात उद्योग ने अब जुलाई 2021 से इसमें 6000/- रुपये प्रति मीट्रिक टन की वृद्धि की मांग की है, जिससे कुल मिलाकर स्टील की क़ीमत 22450/- रुपये प्रति टन हो गई है। इसी अवधि में अमेरिका में स्टील की कीमतों में 175 डॉलर (12800/- रुपये) की वृद्धि हुई, जबकि यूरोप में स्टील की कीमतों में 150 यूरो (12900/- रुपये) की वृद्धि हुई।

10 % से अधिक की CAGR से वृद्धि का अनुमान…

मार्च 2020 में AIFI द्वारा किए गए सबसे नवीनतम द्विवार्षिक सर्वेक्षण के आधार पर, भारतीय फोर्जिंग उद्योग का अनुमानित कारोबार 40,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें से निर्यात का योगदान 14000 करोड़ रुपये है। वित्त-वर्ष 2021-22 के लिए, 2021 और 2024 के बीच भारत में फोर्जिंग उत्पादन में 10 प्रतिशत से अधिक की CAGR से वृद्धि का अनुमान है।

परिणामी प्रभाव से उबरने की कोशिश : यश जिनेन्द्र मुनोत

यश जिनेन्द्र मुनोत, उपाध्यक्ष, AIFI ने बताया कि फोर्जिंग उद्योग में सबसे प्रमुख कच्चे माल के तौर पर स्टील का इस्तेमाल किया जाता है, और फोर्जिंग के एक्स-फैक्ट्री मूल्य में इसकी हिस्सेदारी 60 से 65 प्रतिशत है। अनुमान है कि, क़ीमतों में वृद्धि के साथ यह प्रतिशत बढ़कर लगभग 75 प्रतिशत हो जाएगा। कच्चे माल की लागत के प्रतिशत में इतनी बढ़ोतरी से इस उद्योग का अस्तित्व संकट में आ गया है। पिछले छह महीनों के दौरान स्टील की क़ीमतों में 25 से 30% की वृद्धि हुई है, जिससे फोर्जिंग उद्योग पर संकट गहरा गया है, खासकर जब हम कोविड-19 की वजह से कारोबार को होने वाले नुकसान तथा इसके चलते नकदी प्रवाह एवं नकदी भंडार पर पड़ने वाले परिणामी प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।

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