समाज के लिए बोझ नहीं हैं दिव्यांग, सिर्फ सहारे की जरूरत : केंद्रीय मंत्री, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से दिव्यांगों के लिए सामाजिक अधिकारिता शिविर का आयोजन

– NDI24 नेटवर्क
सिद्धार्थनगर/ लखनऊ.
दिव्यांग समाज के लिए बोझ नहीं है, उन्हें बस सहारे की जरूरत है। दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा का अभिन्न अंग बनाने के साथ ही स्वावलंबी बनाने के लगातार प्रयास हो रहे हैं। यह बातें गुरुवार को एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहीं।

दिव्यांग अपनी जरूरतों को प्रसाशन से कराएं अवगत…

लोहिया कला भवन में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एवं सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सहयोग से दिव्यांगजनों के लिए आयोजित सामाजिक अधिकारिता शिविर को गहलोत ने वर्चुअल माध्यम से बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से दिव्यांगजनों की मदद के लिए तैयार दिव्यांग सेतु एप को भी लांच किया गया। इस एप के माध्यम से दिव्यांग अपनी जरूरतों (उपकरणों) और समस्याओं के बारे में प्रशासन को ऑनलाइन अवगत करा सकते हैं।

17 लाख से अधिक को लाभ : थावर चंद गहलोत

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विभाग पिछले छह वर्षों से दिव्यांगजनों को मुख्य धारा में लाने के लिए लगातार पारदर्शिता के साथ समुदाय के बीच शिविर आयोजित कर उपकरण वितरित कर रही है। वर्ष 2015 से अब तक देश में 9 हजार 334 शिविरों के माध्यम से 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाया जा चुका है।

नीति आयोग ने जिले को लिया गोद : जगदंबिका पाल

इस अवसर पर सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि जिले के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए नीति आयोग ने जिले को गोद लिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। एलिम्को के सहयोग से 80 फीसदी से अधिक दिव्यांगों को नि:शुल्क उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। दिव्यांगजनों को नौकरी के क्षेत्र में आरक्षण देकर स्वावलंबी बनाने का प्रयास जारी है। जिले में 107 दिव्यागंजन को मिलने वाले मोटराइज ट्राई साइकिल से वह न सिर्फ चल सकेंगे, बल्कि रोजगार भी कर सकेंगे। इस इलेक्ट्रानिक वाहन में पीछे बॉक्स बना है। इससे दिव्यांगजन पेपर, दूध व अन्य चीजों को वितरित कर या बिक्री कर परिवार की जीविका चला सकेंगे। इस यंत्र की कीमत 37,000 रुपये प्रति साइकिल है। जिला प्रशासन द्वारा सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से से तैयार किया गया दिव्यांग सेतु एप उपकरण उपलब्ध कराने में काफी सहायक बनेगा। इसे मोबाइल के प्ले स्टोर से डाउनलोड कर अधिक से अधिक उपयोग करें।

सामाजिक रूप से बेहतर प्रयास…

इस अवसर पर जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा – दिव्यागंजनों की हरसंभव मदद को लेकर सरकारी महकमा संजीदा है। सीफॉर ने लॉकडाउन के दौर में निगरानी समिति, पेंशनर्स के बीच कार्य कर उनकी स्थिति व समस्याओं से लगातार अवगत कराता रहा है। दिव्यांगों के लिए एप लांच कर सुविधा उपलब्ध कराना सामाजिक रूप से बेहतर प्रयास है। कार्यक्रम का समापन महाप्रबंधक ले. कर्नल पीके दूबे ने किया। इस दौरान विधायक श्यामधनी राही, एसपी रामअभिलाष त्रिपाठी, दिव्यांजन सशक्तिकरण अधिकारी एजाजुल हक खान, समाज कल्याण अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता, डीडीओ शेषमणि सिंह, एसडीएम अनिल कुमार, एसडीएम सुदामा प्रसाद आदि मौजूद रहे।

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