राजस्थान के शहीद बन्ना राम का 'वादा' रह गया अधूरा
IN DETAIL... सुकमा नक्सली हमला में 25 जवान शहीद, 6 ही हालत नाजुक
Share

राजस्थान के शहीद बन्ना राम का ‘वादा’ रह गया अधूरा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सुकमा में एक दर्दनाक नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 शहीद हो गए हैं। सुकमा में नक्सलियों ने घात लगाकर जवानों पर हमला किया। शहीद जवानों में राजस्थान के बन्ना राम भी शामिल थे। राजस्थान के नीमकाथाना क्षेत्र के गोवर्धनपुरा में रहने वाले हेड कॉन्सटेबल बन्ना राम भी नक्सलियों के हमले का शिकार हो गए। सोमवार देर रात सीआरपीएफ कंट्रोल रूम से बन्ना राम के परिजनों को उनके शहादत की जानकारी दी गई। बन्ना राम के परिजनों ने बताया कि 26 साल पहले साल 1991 में बन्ना राम फौजी के रूप में भर्ती हुए थे। जुलाई 2016 में ही उनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में हुई थी। इससे पहले बन्ना राम अहमदाबाद में तैनात थे।

जल्दी आने को कह कर गए थे बन्ना

परिजनों के मुताबिक, बन्ना राम डेढ़ माह पहले ही छुट्टियां बिताने के लिए गांव आए थे और दोबारा जल्दी आने की बात कह कर गए थे, लेकिन सोमवार देर रात बन्ना राम के शहादत की सूचना मिली। इसके बाद से पूरे गांव में गमगीन माहौल है। लोग बेचैनी के साथ शहीद के बन्ना राम के पार्थिक शरीर के आने का इंतजार कर रहे हैं। आपको बता दें कि शहीद बन्ना राम का बेटा अजय अभी बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। 2 साल पहले ही उन्होंने अपनी बेटी किरण की शादी की थी।

300 नक्सलियों ने बरसाई गोलियां

बन्ना राम समेत सीआरपीएफ के 25 जवान सुकमा में नक्सलियों के कायराना हमले में शहीद हो गए। इस नक्सली हमले पर पूरे देश में दुख और नाराजगी है। घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इन जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन ऑफ गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) ने इस हमले को अंजाम दिया है। ये नक्सली संगठन बुरकापाल और चिंतागुफा इलाकों में बेहद सक्रिय है। नक्सलियों के गढ़ सुकमा में 25 सीआरपीएफ जवानों की शहादत के पीछे कुख्यात नक्सली नेता हिड़मा का हाथ बताया जा रहा है। पीएलजीए की बटालियन 1 का मुखिया हिड़मा ने करीब तीन सौ नक्सलियों के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया।

व्यर्थ नहीं जाने देंगे जवानों का बलिदान : राजनाथ

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने अपने बड़े घातक हमले में 25 सीआरपीएफ के जवानों को शहीद कर दिया है. इस हमले में 6 जवान जख्मी हैं और उनकी हालत नाजुक है। ये नक्सली हमला पूरी तरह से नियोजित था और इसे करीब 300 नक्सलियों ने अंजाम दिया। जिस समय हमला हुआ, उस वक्त दक्षिणी बस्तर के सुकमा में 99 सीआरपीएफ के जवान सड़क बना रहे मजदूरों की सुरक्षा में जुटे थे। ये इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

2010 से अब तक 200 सुरक्षाकर्मी मारे गए

राजनाथ ने कहा कि अब तक नक्सलियों के खिलाफ जो कार्रवाई चल रही है, उसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर रणनीति में बदलाव किया जाएगा। राजनाथ ने नक्सल प्रभावित राज्यों की रिव्यू बैठक 8 मई को दिल्ली में बुलाई है, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ आगामी रणनीति तय की जाएगी। गृहमंत्री राजनाथ ने कहा कि वामपंथी उग्रवादी देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं। केंद्र और राज्य मिलकर अब कार्रवाई करेगी। सुकमा नक्सली हमले के बाद रायपुर का दौरा करने पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। वामपंथी उग्रवादी विकास के खिलाफ है, वे नहीं चाहते है कि गांव वालों का विकास हो इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि हम बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। हालात का जायजा लेने आज गृह मंत्री राजनाथ सिंह रायपुर का दौरा करने पहुंचे। 2010 से अब तक करीब 6 बड़े नक्सली हमलों में करीब 200 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

इसलिए बौखलाए हैं नक्सली

माना जाता है कि नक्सली विकास के कामों से बौखलाए हुए हैं। नक्सलियों को सबसे ज्यादा परेशानी सड़क निर्माण से होता है, क्योंकि जैसे ही सड़क बनती है, जहां लोगों का जुड़ाव शहर से हो जाता है। वहीं प्रशासन के लिए भी दूर-दराज के इलाकों में पहुंचना आसान हो जता है। इसके साथ ही किसी भी हालात से निपटने के लिए सुरक्षाबलों को भेजना आसान होता है। इसलिए नक्सलियों का पहला निशाना सड़क निर्माण के काम को रोकना होता है और यही सुकमा में देखने को मिला।

विकास नहीं चाहते हैं नक्सली

नक्सलियों के प्रभाव वाले राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, बंगाल और मध्य प्रदेश में सरकार ने सड़क निर्माण पर खासा जोर दिया है। इन राज्यों के 44 जिलों में 5,412 किमी सड़क निर्माण की योजना को मंजूरी दी गई है। जैसे ही सड़क बनेगी, सरकारी सुविधा अंदर तक जाएगी और वहां के लोग मेन स्ट्रीम से जुड़ेंगे। इसलिए नक्सली हमला करके इस परियोजना को तबाह कर देना चाहते हैं।

Share