कचहरी बाबा सम्राटों के सम्राट हैं : ब्रह्मलीन देवरहा बाबा
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भक्त आध्यात्मिक न्यायाधीश मानते थे कचहरी बाबा को

– NDI24 नेटवर्क
मिर्जापुर. सीमित और असीमित स्थितियों का संगम दिखा आध्यात्मिक न्यायाधीश श्री श्री श्री 1008 चक्रवर्ती सम्राट अमरगढ़ किला (कचहरी वाले बाबा) के 40वें महानिर्वाण के अवसर पर। फूलों का मनोहारी श्रृंगार, संतों की हाजिरी एवं कार्यकर्ताओ तथा भक्तों की आस्था तो पूरे दिन असीमित-भाव में प्रकट हो रही थी लेकिन महामारी-दौर में श्रद्धालुओं को सीमित एवं नियंत्रित रहने के लिए पहली बार लोहे के पाइप से बैरिकेडिंग किया गया था।

पूजन, श्रृंगार एवं प्रसाद-वितरण…

प्रातः बाबा की चारपाई, मूर्ति तथा समाधि-शिला का पूजन आश्रम के मुख्य पुजारी एवं सेवाधिकारी कचहरी बाबा के पौत्र पं श्रीकांत मिश्र ने किया। जिसमें गैबीघाट हनुमान मंदिर के महात्मा रामानुज दास, मां विंध्यवासिनी के कोतवाल लालभैरव बाबा मंदिर के महन्थ बालकदास गिरि, देवरहा हंस बाबा आश्रम, त्रिमोहानी गुरुद्वारा के वाहेगुरु, कुटी आश्रम (विन्ध्याचल) के उमेश गिरि सहित दो दर्जन मंदिरों और आश्रमों के सन्त-महात्मा परंपरागत रूप में मौजूद रहे।

न्यायाधीशों की आस्था…

कचहरी परिसर में स्थित आश्रम में चली आ रही परम्परा के क्रम में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश श्री लालचंद गुप्त अपने अधीनस्थों के साथ आए तथा कार्यक्रम में आस्था व्यक्त की एवं पुष्प चढ़ाए। अन्य अधिकारियों में संजय हरि शुक्ल, जीतेन्द्र मिश्र, यज्ञेश पांडेय, अनिल यादव (सभी ADJ), अमित यादव, शक्ति सिंह ( दोनों सिविल जज) सहित लगभग 20 न्यायिक अधिकारियों ने कार्यक्रम में आस्था व्यक्त की। इन बड़े न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क लगाकर दर्शन-पूजन का सिलसिला रात भर चलता रहा।

सम्राटों के सम्राट थे कचहरी बाबा…

जिले के सीखड़ क्षेत्र के निवासी कचहरी बाबा की साधना और तपस्या से अति प्रभावित सन्त-शिरोमणि देवरहा बाबा कचहरी बाबा को सम्राटों का सम्राट कहते रहे । देवरहा बाबा के सम्मुख जब कोई मिर्जापुर का पड़ जाता तो वे बोलते थे-‘वहां तो सम्राटों के सम्राट बैठे हैं।’

गुदरिया महराज ने कहा…

स्वामी अड़गड़ानन्द जी महराज के ज्येष्ठ गुरुभाई गुदरिया महराज का संवाद अक्सर उल्लिखित किया जाता है। कथा के अनुसार गुदरिया महराज अपने मिर्जापुर-वाराणसी रोड स्थित आमघाट के पास आश्रम में कुछ श्रद्धालुओं के साथ बैठे थे । अचानक प्रातःकाल आठ बजे के करीब दिन में अंधेरा छा गया। हवाओं की गति का आकलन करना मुश्किल था। लोगों को लगा कि प्रकृति सब कुछ विनष्ट करने पर उतारू हैं। लोग डर गए और गुदरिया महराज से बोले-‘क्या प्रकृति सब तबाह कर देगी?’ इस पर गुदरिया महराज ने आसमान की ओर देखा । शायद वे आसमान का सन्देश जानना चाहते रहे हों और बोले- ‘नहीं, ऐसा नहीं। दरअसल देवरहा बाबा कचहरी बाबा से मिलने आ रहे हैं, प्रकृति झूम रही है। थोड़ी देर में वातावरण शांत हो जाएगा।’ और हुआ भी ऐसा ।

पगला के यहां ले चलो…

कचहरी बाबा के भक्तों के अनुसार वे सोमवार के दिन भक्तों से कहते- ‘इक्का ले आओ, पगला के यहां चलना है।’ पहली बार किसी भक्त ने पूछा-‘किस पगला के यहां चलना है?’ बाबा बोले- ‘अरे तारकेश्वर में जो पगला यानी देवाधिदेव महादेव हैं, उन्हीं का दर्शन करना है।’ यहां का तारकेश्वर महादेव का उल्लेख अनेक पुराणों में मिलता है। तारकासुर द्वारा स्थापित यह मन्दिर है। यहां महालक्ष्मी और विष्णु की साधना का भी उल्लेख धर्मग्रन्थों में है।

तीन दिन में की गई व्यवस्था…

कोरोना को देखते इस बार न कमेटी बन सकी और न 3 महीने की तैयारी। सिर्फ 3 दिनों के भीतर व्यवस्था हुई। जो भक्त नहीं आ सके, उन्हें प्रसाद आए हुए भक्तों के द्वारा घर तक भिजवाया गया। पंक्ति में बैठकर लगभग 50 हजार लोगों का भंडारा तो नहीं हुआ लेकिन प्रसाद अधिकांश घरों तक गया।

नगरपालिका अध्यक्ष ने किया शुभारंभ…

नगरपालिका अध्यक्ष श्री मनोज कुमार जायसवाल ने यहां पूजन अर्चन शुरू कर कार्यक्रम का आरंभ कराया। इसमेँ अहरौरा नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती निर्मला आनन्द भी मौजुद रही। व्यवस्था में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी, विजय सिंह, पंकज मिश्र, रामचन्द्र सोनकर (सभी एडवोकेट), कुलदीप श्रीवास्तव, राजेश कसेरा, रामभरोसे, बाबा या

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