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नांदेड़, परभणी और बीड में महा आघाड़ी के उम्मीदवारों को करनी होगी कड़ी मेहनत, पिछली बार राकांपा को हुआ था नुकसान

– NDI24 नेटवर्क टीम

मुंबई. महाराष्ट्र में मतदाताओं को भ्रमित करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 2014 के चुनाव में रायगढ़ से शुरू हुआ यह सिलसिला 2019 के चुनावों में मराठवाड़ा तक जा पहुंचा है। नांदेड़, परभणी और बीड सीट से महागठबंधन के उम्मीदवारों के सामने उसी नाम वाले अन्य कई उम्मीदवार चुनाव में बाजी पलटने के लिए मैदान में तैयार हैं। विदित हो कि मतदाताओं को सिर्फ भ्रमित करने मात्र के लिए ऐसी रणनीति रायगढ़ की रही है। 2014 के लोस चुनाव में राकांपा के सुनील तटकरे को इससे काफी नुकसान हुआ था, जिसके चलते तटकरे को शिवसेना के अनंत गीते से 2,110 मतों से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं तटकरे के हमनाम वाले निर्दलीय उम्मीदवार को 9,849 मत मिले थे।

दो अशोक चव्हाण मैदान में…

नांदेड़ लोस सीट से प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष अशोक चव्हाण समेत कुल 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें अशोक शंकरराव चव्हाण नाम का निदर्लिय उम्मीदवार भी शामिल है। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को युति के शिवसेना विधायक प्रताप चिखलिकर कड़ी टक्कर देते नजर आएंगे। बीड में राकांपा के बजरंग सोनवणे के सामने भाजपा की प्रीतम मुंडे हैं, जबकि इसमें कुल 36 उम्मीदवारों में बजरंग दिगंबर सोनवणे नाम का एक निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल है। 

एक ही नामाराशि के छह उम्मीदवार…

परभणी सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक सुभाष वानखेड़े कांग्रेस उम्मीदवार हैं, जिनके सामने उन्हीं के नामाराशि अन्य छह उम्मीदवारों ने भी नामांकन भरा है। इसलिए कांग्रेसी नेता के खिलाफ सुभाष नागोराव वानखेड़े, सुभाष परसराम वानखेड़े, सुभाष काशीबा वानखेड़े, सुभाष मारोती वानखेड़े और सुभाष विट्ठल वानखेड़े निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। हालांकि यहां से सुभाष वानखेड़े का मुकाबला सीधे तौर पर शिवसेना के हेमंत पाटील से है, लेकिन एक ही जैसे सरनेम वाले कई उम्मीदवारों की वजह से कांग्रेसी नेता सुभाष को कड़ी मेहनत करनी होगी।

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