मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अब तक तीन बार कर्जमाफी की घोषणा कर चुके हैं : राधाकृष्ण विखे पाटिल
Budget सत्र के दूसरे दिन कर्जमाफी को लेकर हंगामा,

Chief Minister Devendra Fadnavis अब तक तीन बार कर्जमाफी की घोषणा कर चुके हैं : राधाकृष्ण विखे पाटिल

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. राज्य के किसानों की कर्जमाफी को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरने का प्रयास किया। विपक्ष का कहना था कि सरकार ने  हाल ही में कर्जमाफी के आवेदन की तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने किसानों को आवेदन करने के लिए जो अतिरिक्त समय दिया है, उससे यह स्पष्ट हो जा रहा है कि सरकार की ओर से लाभार्थी किसानों की जो सूची घोषित की गई है, वह गलत है। सरकार कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है। सरकार को जल्द से जल्द कर्जमाफी का लाभ देना चाहिए। विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। हंगामे को देखते हुए सभागृह के कामकाज को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। विरोधी पक्षनेता राधाकृष्ण विखे-पाटील ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अब तक तीन बार कर्जमाफी की घोषणा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार अब तक की सबसे ज्यादा कर्जमाफी का दावा करती है। लेकिन दूसरी ओर यह सरकार चौथी बार किसानों के लिए 31 मार्च तक की अतिरिक्त मोहलत दी जा रही है। सरकार की कर्जमाफी का दावा खोखला साबित हो गया है।

नहीं की गई फसल के नुकसान की भरपाई

विखे पाटिल ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए कर्जमाफी पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन उनकी मांग को विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अब इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जयंत पाटील ने भी इस मसले पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले शीतकालीन अधिवेशन के दौरान नागपुर में  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के लिए पात्र किसानों का नाम समेत जो सूची घोषित की थी, उस लिस्ट को सभी विपक्षी पार्टियों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सूची देने की बात भी कही थी, लेकिन आज तक कोई भी सूची नहीं दी गई है। किसानों के फसल नुकसान व कर्जमाफी पर चर्चा कराने पर भी सरकार राजी नहीं है।  सरकार की घोषणा केवल कागजों पर ही है, किसानों को न तो कर्जमाफी का लाभ मिल पाया है और न ही फसल नुकसान की भरपाई ही की गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने हंगामे को देखते हुए सदन के कामकाज को पहले 20 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। 20 मिनट के बाद भी जब हंगामा नहीं थमा, तो  पूरे दिन के लिए कामकाज स्थगित कर दिया गया।

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