मुंबई में पिछले छह सालों में 400 से अधिक सफल यकृत प्रत्यारोपण सर्जरी, ग्लोबल अस्पताल की बड़ी कामयाबी

लीवर प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों की यह टीम पश्चिमी भारत की पहली टीम

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई.
देश को आर्थिक राजधानी मुंबई में परेल स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल, जो पश्चिमी भारत में लीवर प्रत्यारोपण के एक प्रमुख प्रदाता है। पिछले छह वर्षों में 400 से अधिक मरीजों पर सफलतापूर्वक लीवर प्रत्यारोपण सर्जरी की है। जरूरतमंदों पर यकृत प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक करने से अस्पताल सफलता के नए मुकाम पर पहुंचकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। 400 लीवर प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों की यह टीम पश्चिमी भारत की पहली टीम है। इस अवसर पर ग्लोबल अस्पताल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया थे। डॉक्टरों की इस टीम ने भारत में कई प्रत्यारोपण सर्जरी सफलतापूर्वक कि हैं। पहली बार इस टीम ने लीवर और किडनी दोनों का संयुक्त प्रत्यारोपण किया है। पहले स्वैप लीवर ट्रांसप्लांट के अलावा पहला ड्युअल लोब लीवर ट्रांसप्लांट भी किया है।

भारत में कुछ चुनिंदा केंद्र उपलब्ध हैं…

लीवर प्रत्यारोपण के समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर डोनर उपलब्ध कराना और डोनर सेफ्टी पर ध्यान देना। इसके बाद डॉक्टरों की टीम दाता की सुरक्षा के संबंध में रिकॉर्ड रख रही है। किसी भी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दाताओं की जाँच की जाती है। यदि डोनर का अतिरिक्त वजन और रक्त का प्रकार मेल नहीं खाता है तो अक्सर प्रत्यारोपण सर्जरी किसी मरीज पर नहीं की जा सकती है। ऐसे मामलों में हम मरीजों को एक विकल्प चुनने का मौका देते हैं जैसे कि ड्युअल लोब ट्रांसप्लांट या एबीओ ट्रांसप्लांट। इस उपचार के लिए भारत में बहुत ही चुनिंदा केंद्र उपलब्ध हैं।

लीवर प्रत्यारोपण सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण…

अत्याधुनिक उपकरण, यकृत फेल्युअर और यकृत प्रत्यारोपण वाले मरीजों के लिए आईसीयू, विशेषज्ञ डॉक्टर्स और चिकित्सा कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों को इस सफलता हासिल करना संभव हुआ है। महत्वपूर्ण रूप से, मरीजों को लीवर प्रत्यारोपण से पहले और बाद में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा लीवर फेल्युअर के लिए एक नए प्रोटोकॉल द्वारा यकृत की समस्याओं से पीड़ित कई मरीजों को अतिदक्षता विभाग में प्रत्यारोपण के बिना ठीक किया गया है। डॉक्टरों की टीम ने पश्चिमी भारत में सर्वाधिक बच्चों पर यकृत प्रत्यारोपण भी किए हैं। आनुवंशिक कारणों से बच्चों को अक्सर यकृत प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। छोटे बच्चों में रक्त वाहिकाओं के छोटे आकार के कारण लीवर प्रत्यारोपण सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण होती है।

45 ते 55 वर्ष आयु के लोगों की हो चुकी है सर्जरी : डॉ. रवि मोहंका…

परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल के प्रत्यारोपण और एचपीबी सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. रवि मोहंका ने कहा कि 45 ते 55 वर्ष आयु के लोग लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी से गुजर चुके हैं। हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, फैटी लीवर की बीमारी और लीवर कैंसर के कारण पिडित कई मरीजों को यकृत प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। हमने 80 साल के व्यक्ति पर लिव्हर ट्रांसप्लांट सर्जरी की है। इसके अलावा, एक 4.7 किलोग्राम के बच्चे पर यकृत प्रत्यारोपण की सफल सर्जरी हुई है। पश्चिम भारत में यह सबसे कम वजनवाला बच्चा था।

पीड़ित मरीजों को सुविधा देने में हमारा केंद्र सक्षम : डॉ. समीर शहा

ग्लोबल हॉस्पिटल हेपेटालॉजी विभागप्रमुख, लीवर इंटेन्सिव्ह केअर एंड ट्रांसप्लांट हेपेटोलॉजी डॉ. समीर शहा ने बताया कि लीवर की बिमारी से पीड़ित मरीजों को सुविधा देने के लिए हमारा केंद्र सक्षम है। हम लीवर प्रत्यारोपण, हेपेटोलॉजी और लीवर एनेस्थीसिया के लिए अस्पताल में फेलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी कर रहे हैं। वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मुंबई) डॉ. विवेक तलौलीकर ने कहा कि मैं प्रत्यारोपण टीम के सभी सदस्यों को बधाई देना चाहूंगा, जिन्होंने पश्चिम भारत में सबसे व्यापक यकृत प्रत्यारोपण कार्यक्रम के विकास में योगदान दिया है। लीवर प्रत्यारोपणवाले मरीजों की अस्पताल में उचित देखभाल की जाती है। इसके अलावा हम अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसार अपनी सेवाएं देने की अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास करते हैं।

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