जून के मध्य घनघोर बारिश का 40 साल का रिकार्ड टूटा, दशहरा के पहले आधा मीटर से ज्यादा गंगा इठलाई

बरसात देखते मनरेगा मजदूरों को प्राकृतिक ऑक्सीजन सिलिंडर के स्वरूप वृक्षों के लगाने का काम दिया जाए

– सलिल पांडेय
मिर्जापुर. जून महीने के मध्य बादलों के झूम कर बरसने का 40 वर्षों से अधिक का रिकार्ड टूट गया है। 17 एवं 18/6 (दो दिनों) की सुबह तक जिले में 63 MM पानी का आवक आसमान से धरती पर रहा जबकि 18-19/6 की सुबह 8 बजे तक 27 MM की बरसात हुई है। शनिवार की स्थिति देखकर अनुमान है कि यह रिकॉर्ड शाम होते-होते गत दो दिनों के रिकार्ड को एक ही दिन में तोड़कर आगे निकल जाएगा। गंगा में दो दिनों के बीच एक CM प्रति घन्टा की दर से गंगा अपने प्रभामण्डल को बढ़ा रही है। दो दिनों के बीच में 580 CM गंगा का जल स्तर बढ़ा है।

किसान भी झूमे…

धान का बेहन लगा रहे किसान आकाशीय पानी को सोने का पानी मान रहे है। खेत के लहलहाने की कल्पना कर किसान अपने समूचे परिवार के साथ बरसाती पानी में भींगते हुए भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत पसंद चावल की खेती के लिए बीजारोपण में लगे हैं। इसमें अधिया पर (उपज का आधा-आधा हिस्सा) बड़े किसानों से लिए गए खेत के मजदूर आगे दिख रहे हैं। ज्यादातर लोग खेत अधिया पर दे देते हैं और जो खुद इस काम में लगते हैं, वे कृषि मजदूरों को साथ लेकर लगे हैं।

कोरोना में मनरेगा में काम हो…

कोरोना के चलते बड़े शहरों से भाग कर आए ग्रामीणों में पढ़े-लिखे लोगों को काम की कमी देखते हुए इन लोगों को वृक्षारोपण अभियान में लगाया जाना चाहिए। इसके लिए स्कूलों, पंचायत-भवनों सहित निजी जमीनों पर ब्रिक-गार्ड के साथ अधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों का रोपण किया जा सकता है। गत दिनों कमिश्नर योगेश्वरराम मिश्र (Yogeshwar ram Mishra) ने जब मुख्य वन संरक्षक रमेश झा (Ramesh Jha) से इस संबंध में विचार-विमर्श के दौरान अधिक ऑक्सीजन वाले वृक्षों को लगाने पर चर्चा की थी तो यह सुझाव भी प्रबुद्धजनों द्वारा दिया गया था कि यदि कोई निजी जमीन स्वेच्छया वृक्षारोपण के लिए दे तो उस पर वन विभाग ब्रिक गार्ड बनवा कर वृक्षारोपण कराए। इससे इन वृक्षों की देखरेख होती रहेगी, जबकि सड़क किनारे और वन-भूमि में लगे वृक्ष जीवित नहीं रह पाते।

सड़क धंसी…

चुनार के बहराजगंज में 300 मीटर सड़क धंस गई। जिससे आवागमन प्रभावित हो गया।

पशु छोड़ भागे…

चुनार क्षेत्र के अदलपुरा में पिकप से पशु ले जा रहे कतिपय पशु-तस्कर रात में पशु सहित पिकप छोड़कर भाग गए।

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