मृतक आश्रित राहत से वंचित हो सकते हैं, मिर्जापुर में मृतकों की संख्या 92

– सलिल पांडेय
मिर्जापुर. स्वास्थ्य विभाग नित्य जारी बुलेटिन (Health Bulletin) में कोरोना से मृतकों की दिखाई जाने वाली संख्या 92 है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह रिकॉर्ड सरकारी L-2 और जिले में बनाए गए 11 प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती तथा इलाज के दौरान मृत लोगों के आधार पर निर्धारित है। यह भी स्पष्ट किया गया कि जिले या जिले के बाहर प्राइवेट स्तर पर इलाज के दौरान मृत लोगों की संख्या इसमें शामिल नहीं है।

उपचार के बीच मृत्यु…

इस संबंध में प्रबुद्ध लोगों ने सुझाव दिया है कि जो मरीज पॉजिटिव होकर स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर होम आइसोलेशन में थे और उपचार के बीच मृत्यु हो गई, उन्हें भी मृत-सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

अनेकानेक लोगों के मरने की खबरें…

कोरोना की पहली लहर में पॉजिटिव लोगों को L-1 में सरकार रखती थी, जहां खाना-नाश्ता, दवा आदि स्वास्थ्य विभाग देता था। इसे समाप्त कर दिया गया। ऐसी स्थिति में सिर्फ दवा देने का निर्णय तो हुआ, लेकिन सबको मिल भी नहीं सका। कोरोना की तेज-रफ्तार का कारण होम-आइसोलेशन भी हो सकता है। घर के एक व्यक्ति ने घर के ही कई सदस्यों को संक्रमित कर दिया और इन सदस्यों के चलते गांव-मुहल्ला भी चपेट में आ गया। इस कारण जिले के ही कई गांवों में अनेकानेक लोगों के मरने की खबरें आती रहीं।

कुछ मंडलीय अस्पताल में भर्ती थे…

मृत्यु चाहे जिन कारणों से हुई लोगों ने उस दौरान कोरोना को ही इन हादसों का जिम्मेदार माना, लेकिन जो रिकॉर्ड में हैं कि वे होम आइसोलेशन में थे, उनको रेकॉर्ड में लेना चाहिए, ताकि मृतकों के आश्रितों को सरकार कोई सुविधा दे तो वह आश्रितों को मिल सके। कुछ लोग L-2 में पहुंचे पर एडमिट होने की प्रक्रिया पूरी होने के पहले मर गए। कुछ मंडलीय अस्पताल में भर्ती थे। टेस्ट में पॉजिटिव आए पर L-2 में बेड न मिल पाने के कारण मर गए।

उच्च अधिकारियों से कार्रवाई को मांग…

कुछ लोग यहां से डिस्चार्ज कराकर गैर जिले बेहतर इलाज के लिए गए लेकिन बच न सके। ऐसे लोगों को भी कोरोना मृतक की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। प्रबुद्ध लोगों ने उच्च अधिकारियों से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है।

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