अब नहीं होगी Oxygen की कमी, IIT Bombay ने ढूंढ़ निकाला यह आसान तरीका

अब नाइट्रोजन की यूनिट से बनेगी ऑक्सीजन, 94 प्रतिशत शुद्ध होने का दावा

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. ऑक्सीजन (Oxygen) की समस्या से जूझ रहे पूरे देश के लिए आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) की एक से एक राहत भरी खबर आई है। आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर ने विभिन्न उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली नाइट्रोजन की यूनिट (Unit of nitrogen) से ऑक्सीजन बनाने का तरीका खोज निकाला है। मौजूदा यूनिट (Unit) में कुछ मामूली बदलाव कर 2 से 3 दिन में नाइट्रोजन यूनिट (Nitrogen Unit) के चिकित्सकीय ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू किया जा सकता है। इस तकनीकी की मदद से बनने वाली ऑक्सीजन 94 प्रतिशत शुद्ध होने का दावा आईआईटी बॉम्बे ने किया है।

मरीजों के उपचार के लिए उपयोग…

आईआईटी बॉम्बे की ओर से टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड के साथ मिलकर किए गए इस प्रयोग में कामयाबी मिली है। आईआईटी बॉम्बे के मैकेनिकल डिपार्टमेंट के प्रोफेसर मिलिंद आत्रे (Milind Atre) के अनुसा, प्रयोग के तहत प्रेशर स्विंग एडसरप्शन (Pressure swing adshorption) नाइट्रोजन यूनिट को साधारण तकनीकी बदलावों से भी ऐसे ऑक्सीजन यूनिट में बदल दिया गया। इस दौरान करीब 94 प्रतिशत तक शुद्ध ऑक्सीजन के उत्पादन में सफलता मिली है। इसका उपयोग अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए किया जा सकता है।

टैंक से ऑक्सीजन होती है अलग…

प्रोफेसर मिलिंद के अनुसार, वातावरण में ऑक्सीजन के अलावा बहुत सी चीजें होती हैं। इस तकनीकी में मशीन वायुमंडल में मौजूद हवा को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती है। हवा में मौजूदा पानी, कार्बन, ऑक्सीजन वगैरह को अलग करती है। फिर एक टैंक के माध्यम से हवा में मौजूद ऑक्सीजन को अलग किया जाता है।

इनके बीच साइन हुआ एमओयू…

इस प्रयोग के लिए आईआईटी बॉम्बे, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (Tata Consulting Engineers) और स्पेनटेक इंजीनियर्स (Spantech engineers) के बीच एक एमओयू (MOU) साइन किया गया था। इसके तहत किए गए इस काम में ऑक्सीजन बनाने का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (Standard operating procedure) तैयार किया गया।

कई औद्योगिक संयंत्रों में नाइट्रोजन यूनिट का उपयोग…

नाइट्रोजन यूनिट का उपयोग देश के कई औद्योगिक संयंत्रों में किया जाता है। इनमें दो-तीन दिन में कुछ बदलाव कर इस यूनिट का इस्तेमाल ऑक्सीजन बनाने के लिए हो सकता है।

– प्रो. मिलिंद अत्रे, मैकेनिकल डिपार्टमेंट, आईआईटी बॉम्बे

इस तरह की भागीदारी बहुत जरूरी…
इस प्रयोग की सफलता के लिए इसमें शामिल टीम को बधाई और शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच इस तरह की भागीदारी बहुत जरूरी है।

– प्रो. सुभाशीष चौधरी, डायरेक्टर, आईआईटी बॉम्बे

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