8 हजार 448 अनाधिकृत रहवासियों के लिए गृह निर्माण विभाग का राहत भरा फरमान

NDI24 नेटवर्क
मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के ट्रांजिट कैंपों में वर्षों से रहने वाले 8 हजार 448 अनाधिकृत रहवासियों के लिए गृह निर्माण विभाग ने एक परिपत्रक निकालकर अपात्र लोगों को पात्र ठहराया है, लेकिन यह प्रक्रिया म्हाडा ही करेगा, ऐसा निर्देश मिलने पर म्हाडा असमंजस की स्थिति में है। दरअसल, बांद्रा के भारत नगर ट्रांजिट कैंप का शुभारंभ हो गया है, लेकिन जो अनाधिकृत हैं, उनसे कैसे निपटा जाए। इस सोच के चलते म्हाडा में जहां हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं अधिकारी भी परेशान हैं।

म्हाडा को ही पूरी करनी होगी पात्रता…


म्हाडा सभी को सस्ते घर देता आया है और लोगों का विश्वास भी उस पर है। भारत नगर इलाके में म्हाडा महंगे घर बनाकर और अमीरों को बेचकर गरीबों के लिए दूसरे सस्ते घर बनाने वाली थी। यह प्रकल्प अब पूर्ण हो गया है, लेकिन अनाधिकृत लोगों की पात्रता भी म्हाडा को ही पूर्ण करनी होगी।

म्हाडा के रिपेयर बोर्ड को निर्देश…


महाराष्ट्र गृह निर्माण विभाग के निर्णय के अनुसार, 21 सितंबर 2020 के आवेदन को लेकर म्हाडा के भारत नगर एबीआईएल बिल्डकॉन कंपनी को पुनर्विकास के लिए दिया गया है। म्हाडा की तफ्तीश के बाद उसने इन अनाधिकृत लोगों से सहमति पत्र ले लिया है, लेकिन म्हाडा के रिपेयर बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि इन अनाधिकृत लोगों को पात्र ठहराया जाए।

घर का किराया तक नहीं देते रहिवासी…


गृह निर्माण विभाग ने 13 सितंबर 2019 को एक जीआर निकालकर यह कहा था कि म्हाडा इस विषय पर ध्यान नहीं दे रहा है। इनमें अनाधिकृत लोगों को कैसे पात्र ठहराया जाए, यह प्रश्न म्हाडा के सामने खड़ा है। अनाधिकृत तरीके से रह रहे इन लोगों को शिविर से बाहर निकालने के लिए म्हाडा अभी तक पूरी तरह से फेल ही रही है। इस शिविर में निवास कर रहे लोग न सिर्फ फ्री में रहते हैं, बल्कि घर का किराया-भाड़ा तक नहीं देते।

पुनर्विकास में तकलीफ आना निश्चित…


इसी बीच इन अनाधिकृत लोगों को मानवता की दृष्टि से इन लोगों को भी घर देने के बाबत चर्चा शुरू हो गई और शासन के पास इस बाबत 13 सितंबर 2019 को एक नोटिस जारी किया गया था। इस गृह निर्माण विभाग ने इन लोगों को पात्र ठहराकर घर देने की सिफारिश की थी, लेकिन म्हाडा के पास इसका प्लान अभी तक तैयार न होने की वजह से इस पुनर्विकास में तकलीफ आना निश्चित है।

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