कोयला खदानों की नीलामी में भाग लेने की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी निजी क्षेत्र में खनन की अनुमति, सीआईएल का एक अधिकार खत्म...

कोयला खदानों की नीलामी में भाग लेने की मंजूरी

– NDI24 नेटवर्क
नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को निजी क्षेत्र को व्यावसायिक खनन की अनुमति दे दी। इससे इस क्षेत्र पर सरकारी खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का एकाधिकार समाप्त हो गया है। रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि इस क्षेत्र में दक्षता लाने के लिए निजी कंपनियों को कोयला खदानों की नीलामी में भाग लेने की मंजूरी दी गई है। वर्ष 2010 में कोयला ब्लाक आवंटन से जुड़े एक बड़े घोटाले के आने के बाद इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आवंटित सभी 204 कोयला ब्लाकों की नीलामी निरस्त कर दी थी। गोयल ने कहा कि सरकार ने कोयला क्षेत्र में कई कदम उठाए हैं, जिससे व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, कोयला उत्पादन में दक्षता आएगी, कोयला आयात में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। भारत में 300 अरब टन कोयला होने के आसार है। जानकार मानते हैं कि अगर अभी कोयला नहीं निकाला गया तो जिस रफ्तार से दूसरे ऊर्जा स्त्रोतों में तकनीकी विकसित हो रही है, उसे देखते हुए दो दशक बाद कोयला की जरूरत ही नहीं रहेगी। यह भी एक वजह है कि भारत अपने कोयला खदानों का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना चाहता है।

आयातित कोयला पर निर्भरता समाप्त

उन्होंने कहा कि नई पद्धति के अनुसार, नीलामी पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन होगी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कार्यप्रणाली पारदर्शिता, व्यापार करने में आसानी और राष्ट्रीय विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मंत्री ने कहा कि कोई एंड-यूज और मूल्य प्रतिबंध नहीं होगा। यह कंपनियों पर निर्भर करेगा कि वे खुले बाजार में कीमतों को कम करें। कोयला ब्लाकों की नीलामी मौजूदा तरीके से ही होगी, जिसे काफी पारदर्शी माना जा रहा है। नीलामी से प्राप्त होने वाला सारा राजस्व राज्यों के खजाने में जाएगा। इससे यह फैसला झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। इन राज्यों में तेजी से आर्थिक विकास हो सकता है। इसका दूसरा फायदा यह होगा कि देश में कोयला उत्पादन बढऩे से आयातित कोयला पर निर्भरता खत्म होगी। वर्ष 2009-10 के बाद से भारत ने इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, मोजाम्बिक जैसे देशों से बड़े पैमाने पर कोयला आयात किया है।

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