​वडाला और जैकब सर्कल के बीच यात्रियों को भारी राहत, 74% कम लागत से निर्मित पहली स्वदेशी मोनो : आरए राजीव

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने वडाला और जैकब सर्कल के बीच यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। मोनोरेल कॉरिडोर पर यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए ट्रेन की फ्रीक्वेंसी 30 मिनट से घटाकर 18 मिनट करने का निर्णय लिया गया है। एमएमआरडीए आयुक्त आर. ए. राजीव ने मोनोरेल को हरी झंडी दिखाकर बुधवार को रवाना किया। ग्लोबल टेंडर जारी करने के बाद भी रेक की सप्लाई न होने के चलते मोनो प्रोजेक्ट सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा था। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि स्वदेशी मोनो रेल की लागत रिवर्स इंजीनियरिंग की मदद से 74% तक कम की गई है। जैकब सर्कल और चेंबूर के बीच 21 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर अभी तक मोनोरेल की फ्रीक्वेंसी 30 मिनट की थी। मुंबई में 2014 में मोनो रेल की शुरुआत की गई थी। 
यहां देखिए भारत में निर्मित मोनो रेल का पूरा वीडियो…

वडाला और जैकब सर्कल के बीच 2/3 यात्री…

विदित हो कि एमएमआरडीए के पास कुल 10 मोनोरेल हुआ करती थी, जिनमें से दो मोनोरेल तो पूरी तरह से कबाड़ हो चुकी हैं और एक मोनोरेल जल गई थी। फिलहाल अब एमएमआरडीए के पास सिर्फ सात मोनोरेल ही बची हैं। आयुक्त राजीव ने आगे बताया कि हमने यात्रियों की यात्रा पैटर्न का अध्ययन किया है, जिससे पता चलता है कि यात्रियों में से वडाला और जैकब सर्कल के बीच 2/3 यात्री यात्रा करते हैं तो वहीं चेंबूर और वडाला के बीच 1/3 यात्री ही मोनोरेल की सेवा ले रहे हैं। 


सिर्फ 8 करोड़ रुपये की मोनो…

एमएमआरडीए कमिश्नर राजीव ने कहा कि हमने 2018 से काफी लंबा संघर्ष मोनोरेल को लेकर किया है। हमें यह तक नहीं पता था कि इसके कलपुर्जे कहां से लाए जाएं और कैसे बनाए जाएं! तब तक मोनोरेल के किसी भी पार्टी के लिए हम पूरी तरह से स्वदेशी कंपनियों पर ही निर्भर थे। ऐसे में हमने मेट्रो बनाने वाली कंपनियों से अनुरोध किया था कि वह मोनो रेल के पार्ट्स भी बनाएं! राहत की बात है कि 2 साल की कड़ी मेहनत के बाद हम इसमें सफल रहे और अब हमने स्वदेशी पार्ट्स की मदद से एक पूरी मोनोरेल तैयार कर ली है। वहीं आगे आने वाले सप्ताह में हम इस तरह की सात मोनो रेल पटरी पर लाने के लिए प्रयत्नशील हैं। इस मोनो रेल के लिए रिवर्स इंजीनियरिंग की मदद से 74% रुपयों की बचत की गई है और यह 8 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो गई है। जबकि यही पार्ट्स अगर बाहर से मंगवाए होते तो इसकी लागत 74% अधिक रहती।

एक मोनोरेल को स्टैंडबाय में रहेगी…

सामने वडाला और जैकब सर कल के बीच चार मोनो रेल चलाने का फैसला किया है जबकि दो मोनोरेल चेंबूर वडाला के बीच चलती रहेंगी साथ ही एक मोनोरेल को स्टैंडबाय में रखा गया है इस योजना के तहत वडाला और जैकब सर्कल के बीच 18 मिनट पर तो वही चेंबूर और वडाला के लिए 30 मिनट पर मोनोरेल उपलब्ध रहेगी।

– आर. ए. राजीव, आयुक्त, एमएमआरडीए

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